1.इमाम अली इब्ने अबु तालिब अ०
हज़रत अली अ० की विलादत जुमे के दिन 13 रजब 30 आमूलफिल को ख़ानाये ख़ुदा मे हुई ! (अंग्रेजी तारीख़ 11 अक्टूबर 598 ई० ) आपके वालिद का नाम जनाबे इमरान इब्ने अब्दुल मुताल्लिब और आपकी वालिदा का नाम जनाबे फ़ातिमा बिन्ते असद है ! आपको मुर्तज़ा का लक़ब मिला !
इमाम अली अ० ने 5 साल हुकूमत की और 19 रमज़ान की शब 40 हिजरी को नमाज़े सुबह की अदायगी की हालत मे मस्जिदे कूफ़ा मे पलीद तरीन इंसान इब्ने मुल्जिम की ज़हर भरी तलवार से इमाम अली अ० पर वार किया और उसके दो रोज़ बाद रमज़ान की 21 को जुमेरात के दिन (अंग्रेजी 31 जनवरी 661 ई०) 63 साल की उम्र मे शहादत नोश फ़रमाई !
आपके जिस्म को नजफ़ की मुक़द्दस सर ज़मीन मे सुपुर्दे ख़ाक किया !
इमाम अली अ० ने 5 साल हुकूमत की और 19 रमज़ान की शब 40 हिजरी को नमाज़े सुबह की अदायगी की हालत मे मस्जिदे कूफ़ा मे पलीद तरीन इंसान इब्ने मुल्जिम की ज़हर भरी तलवार से इमाम अली अ० पर वार किया और उसके दो रोज़ बाद रमज़ान की 21 को जुमेरात के दिन (अंग्रेजी 31 जनवरी 661 ई०) 63 साल की उम्र मे शहादत नोश फ़रमाई !
आपके जिस्म को नजफ़ की मुक़द्दस सर ज़मीन मे सुपुर्दे ख़ाक किया !
2.इमाम हसने मुजतबा इब्ने इमाम अली अ०
इमाम हसन की विलादत जुमे के दिन 15 शाबान 3 हिजरी को शहरे मदीना मे हुई (अंग्रेजी 2 मार्च 625 ई०) आपको मुजतबा का लक़ब मिला !
आपका नाम ख़ुदा की तरफ से हसन रखा गया आपके वालिद का नाम इमाम अली अ० और आपकी वालिदा का नाम जनाबे फ़ातिमा बिन्ते रसूल है !
आपका नाम ख़ुदा की तरफ से हसन रखा गया आपके वालिद का नाम इमाम अली अ० और आपकी वालिदा का नाम जनाबे फ़ातिमा बिन्ते रसूल है !
माविया ने आपकी बीवी जद्दा बिन्ते अशब के ज़रिये से आपको ज़हर दिलवा दिया 47 साल की उम्र मे 28 सफ़र 50 हिजरी को जुमे के दिन (अंग्रेजी 30 मार्च 670 ई०) को आपने शहादत नोश फ़रमाई आपको मदीने के क़बररिस्तान जनत्तुल बक़ी मे दफ़न किया गया !
3.इमाम हुसैन इब्ने इमाम अली अ०
इमाम हुसैन की विलादत मंगल के दिन 3 शाबान 4 हिजरी (अंग्रेजी 10 जनवरी 626 ई०) को हुई ! आपका नाम भी हुक्मे ख़ुदा से रखा गया !आपके वालिद का नाम इमाम अली अ० और वालिदा का नाम जनाबे फ़ातिमा है आप इमाम हसन के छोटे भाई है!
आपको सय्यदुश शोहदा का लक़ब मिला !
आपने ने 10 मोहर्रम 60 हिजरी को (अंग्रेजी 12 अक्टूबर 680 ई०) 57 साल की उम्र मे शहादत नोश की और आपकी शहादत के बाद दुश्मनो ने माले असहाब लूट लिया और अहलेबैत को असीर करके शहीदों के सरो को कूफ़े और कूफ़े से शाम ले जाया गया !
4.इमाम ज़ैनुल आबेदीन इब्ने इमाम हुसैन अ०
इमाम ज़ैनुल आबेदीन की विलादत 5 शाबान 30 हिजरी को जुमे के दिन शहरे मदीना मे (अंग्रेजी 31 अक्टूबर 658 ई०) को हुई आपके वालिद का नाम इमाम हुसैन अ० और आपकी वालिदा का नाम जनाबे शहरे बानो है
आपको ज़ैनुल आबेदीन का लक़ब मिला !
आपको ज़ैनुल आबेदीन का लक़ब मिला !
आप ने 57 साल ज़ेहमतो मुसीबत के बाद वालिद इब्ने अब्दुल मलिक ने ज़ेहर के ज़रिये 25 मोहर्रम 95 हिजरी जुमेरात के दिन (अंग्रेज़ी 23 अक्टूबर 714 ई०) को शहादत पायी और आप जनत्तुल बक़ी में इमाम हसन अ० की क़बर के पहलु मे सुपुर्दे ख़ाक हुए !
5.इमाम मौ० बाकिऱ इब्ने इमाम जैनुल आबेदीन अ०
इमाम मौ० बाकिऱ की विलादत जुमे के दिन पहली रजब 57 हिजरी को शहरे मदीना (अंग्रेजी 12 मई 677 ई०) मे हुई
आपको बाकिऱ का लक़ब मिला !
आपको बाकिऱ का लक़ब मिला !
आपके वालिद का नाम इमाम ज़ैनुल आबेदीन और आपकी वालिदा का नाम जनाबे फ़ातिमा बिन्ते हसन है !
7 ज़िलहिज 114 हिजरी को मंगल के दिन (अंग्रेजी 31 जनवरी 733 ई०) को 57 साल की उम्र मे बिन अब्दुल मलिक के हाथो आप शहीद हुए और आपको जनत्तुल बक़ी मे सुपुर्दे खाक किया गया !
6.इमाम जाफ़रे सादिक़ इब्ने मौ० बाकिऱ
इमाम जाफ़रे सादिक़ की विलादत रसूले ख़ुदा की विलादत के दिन 17 रबीउल अव्वल को 83 हिजरी को बुध के दिन (अंग्रेजी 23 अप्रैल 702 ई०) को हुई
आपको सादिक़ लक़ब मिला !
आपको सादिक़ लक़ब मिला !
आपके वालिद का नाम मौ० बाकिऱ अ० और वालिदा उम्मे फरवाह है !
आपकी शहादत 15 शव्वाल 148 को मंगल (अंग्रेजी 7 दिसंबर 765 ई०)65 साल की उम्र मे मंसूर के ज़रिये ज़हर से शहीद हुए ! आपके जिस्मे अक़दस को आपके वालिद के पहलु मे जनत्तुल बक़ी मे सुपुर्दे खाक किया गया !
7.इमाम मूसा काज़िम इब्ने इमाम जाफ़रे सादिक़ अ०
7.इमाम मूसा काज़िम इब्ने इमाम जाफ़रे सादिक़ अ०
इमाम मूसा काज़िम की विलादत 7 सफ़र 128 हिजरी को हफ्ते के दिन (अंग्रेजी 10 नवंबर 745 ई०) को मक़ामे अबवा मे हुई !
आपको काज़िम लक़ब मिला !
आपको काज़िम लक़ब मिला !
आपके वालिद का नाम इमाम जाफ़रे सादिक़ अ० और वालिदा का नाम हमीदा खातून है !
आपकी शहादत 25 रजब 183 हिजरी हफ्ते के दिन 55 साल की उम्र मे (अंग्रेजी 4 दिसंबर 799 ई०) क़ैदखाने में हारुन के हुक्म से आपको ज़हर दिया गया और बगदाद मे क़ुरैश के मक़बरे मे सुपुर्दे लहद कर दिया !
8.इमाम अली रज़ा इब्ने इमाम मूसा काज़िम अ०
इमाम अली रज़ा (इमाम अली इब्ने मुसर्रिज़ा) की विलादत 11 ज़िकादा 148 हिजरी को हफ्ते के दिन (अंग्रेजी 13 अगस्त 766 ई०) को हुई ! आप अपने जद की रहलत के 16 दिन बाद इस दुनिया मे तशरीफ़ लाये !
आपको रज़ा लक़ब मिला !
आपको रज़ा लक़ब मिला !
आपके वालिद का नाम इमाम मूसा काज़िम अ० और वालिदा का नाम खेज़रान है
आपकी शहादत माहे सफ़र के आखिर मे 23 ज़िकाद 203 हिजरी इतवार के दिन (अंग्रेजी 26 मई 819 ई०) 55 साल की उम्र मे मामून ने ज़हर के ज़रिये आपको क़त्ल कर दिया और आपके जिस्म मो हारून की कब्र के पास सुपुर्दे खाक किया गया !
9.इमाम मौ० तक़ी इब्ने इमाम अली रज़ा अ०
इमाम मौ० तक़ी की विलादत 10 रजब 195 हिजरी मंगल के दिन (अंग्रेजी 12 अप्रैल 811 ई०) को हुई
आपको तक़ी का लक़ब मिला !
आपको तक़ी का लक़ब मिला !
आपके वालिद का नाम इमाम अली रज़ा अ० और आपकी वालिदा का नाम साबिका है !
आपकी शहादत 29 ज़िक़ादा 203 हिजरी मंगल के दिन 25 साल की उम्र मे (अंग्रेजी 27 नवम्बर 835 ई०) को बगदाद बुला कर ज़हर से शहीद किया गया आपके जिस्म को हज़रत इमामे मूसा अ० के पहलु मे सुपुर्दे खाक कर दिया कुछ रिवायतों मे बताया गया है आप सामरा मे दफ़न है !
10. इमाम अली नक़ी इब्ने इमाम मौ० तक़ी अ०
10. इमाम अली नक़ी इब्ने इमाम मौ० तक़ी अ०
इमाम अली नक़ी की विलादत 5 रजब 214 हिजरी को मंगल के दिन (अंग्रेजी 11 नवम्वर 829 ई०) सीरीया मे पैदा हुए ! आपके वालिद का नाम इमाम मौ० तक़ी और आपकी वालिदा का नाम समाना है !
आपको नक़ी का लक़ब मिला !
आपकी शहादत 3 रजब 354 हिजरी को इतवार के दिन (अंग्रेज़ी 1 जुलाई 868 ई०) को 40 साल की उम्र मे आपको ज़हर दिया गया और सामरा मे आपके अपने घर मे ही आपको सुपुर्दे ख़ाक किया गया !
11.इमाम हसन अस्करी इब्ने इमाम अली नक़ी अ०
इमाम हसन अस्करी की विलादत 10 रबिउस्सानी 232 हिजरी को जुमेरात के दिन (अंग्रेजी 6 दिसंबर 846 ई०) को मदीने में हुई ! आपके वालिद का नाम इमाम अली नक़ी अ० और वालिदा का नाम हादिसा खातून है !
आपको अस्करी का लक़ब मिला !
आपको अस्करी का लक़ब मिला !
आपकी शहादत 8 रबीउलअव्वल 260 हिजरी को जुमेरात के दिन 28 साल की उम्र मे (अंग्रेजी 4 जनवरी 874 ई०) को ज़हर के ज़रिये हुई ! आपके वालिद की क़ब्र के पहलु मे सामरा मे आपको दफ़न किया गया !
12.इमाम मौ० मेहदी इब्ने इमाम हसन अस्करी अ०
इमाम मौ० मेहदी की विलादत जुमे के दिन 15 शाबान 255 हिजरी को (अंग्रेजी 1 अगस्त 869 ई०) को सुबह सादिक़ के वक़्त पैदा हुए !
आपको मेहदी लक़ब मिला !आपके वालिद का नाम इमाम हसन अस्करी अ० और वालिदा का नाम नरजिस खातून है !
आपको मेहदी लक़ब मिला !आपके वालिद का नाम इमाम हसन अस्करी अ० और वालिदा का नाम नरजिस खातून है !
आपको इममे ज़माना के नाम से भी जाना जाता है आपको इममे वक़्त के नाम से इसीलिए जाना जाता है क्योंकि आप ख़ुदा के हुक्म से ज़िंदा है मगर आम नज़रो से ओझल है आपने सामरा के तहखाने मे ग़ैबत फ़रमाई !
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